दिल की बात
चार दशक की सक्रिय पत्रकारिता के दौर में मैंने उन ढेर सारे खट्टे मीठे अनुभवों को जीया है जो प्रिंट मीडिया में आये उन बलदवालों के जीवंत दस्तावेज हैं जिनकी चर्चा- परिचर्चा करके फुर्सत के क्षणों में अतीत के गौरवशाली इतिहास को एक धरोहर के रूप में याद रखा जा सकता है। सत्तर के दशक में जब मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में पहला कदम रखा था तब साप्ताहिक समाचार पत्रों का दौर था। प्रदेश में इने-गिने ही दैनिक अखबार थे, जो राजधानी जयपुर, अजमेर व जोधपुर से ही प्रकाशित होते थे। बाकी पत्रकारिता के नाम पर जिला मुख्यालयों से स्थानीय साप्ताहिक अखबार ही थे जो आम लोगों तक अपले इलाकों की खबरें पहुंचाया करते थे। इन अखबारों से जुड़े पत्रकार हालांकि आर्थिक दृष्टि से संपन्न नहीं होते थे, परन्तु सामाजिक सम्मान व प्रतिष्ठा की दृष्टि उनका एक स्थान हुआ करता था। धीरे-धीरे समय बदला और जो पत्रकारिता किसी समय पर एक मिशन हुआ करती थी वह बदलते-बदलते एक तगड़े 'प्रोफेशनÓ में बदल गयी और आज इस क्षेत्र में जो कमाई व क्रेज है वह किसी अच्छी भली इंडस्ट्री से कम नहीं है। पुराने पत्रकार भले ही आज भी लकीर के फकीर बने फाकामस्ती की जिंदगी बिताते मिल जाये परन्तु नये- नये बनने वाले पत्रकार तो एक अच्छे से पैकेज से अपने कैरियर की शुरुआत करते हैं और कुछ ही समय में जरुरत की सारी भौतिक सुख सुविधाएं जुटाकर अच्छी भली 'लग्जरी ' लाईफ एंजोय करने लगते हैं। इसके लिए उन्हें मेहनत के साथ- साथ फील्ड में रोज नई चुनौतियां भी स्वीकार करनी पड़ती है। मगर यह चुनौतियां उन्हें अपने कार्य व लक्ष्य के प्रति नवीन उर्जा ही प्रदान करती है। ऐसे में हमारे सामने आज पत्रकारिता का जो बदला हुआ स्वरूप नजर आता है उसमें मालिक से लेकर सामान्य पत्रकार तक हर कोई पूरी तरह संतुष्ट नजर आता है।
पत्रकारिता के इसी बदलते माहौल में अब प्रिंट मीडिया के मुकाबले इलेक्ट्रोनिक व सोशियल मीडिया का जो स्वरूप उभरा है उसने तो पत्रकारिता के सारे आयाम ही बदल दिये हैं। इस बदले माहौल में खबरों के पाठक कम व दर्शक और श्रोता ज्यादा होते जा रहे हैं। लोग पढऩे से पहले खबर को स्क्रीन पर विस्तार से देख व सुन चुकते हैं। ऐसे में पत्रकारिता में जिंदा रहने के लिए मेरी पीढ़ी के पत्रकारों को भी नये परिवेश में ढलना पड़ रहा है। शेखावाटी जनपद में चूंकि कोई बड़ा न्यूज चैनल नहीं है, ऐसे में यहां के समाचारों को वह महत्व नहीं मिल पाता जो लोगों की जिज्ञासा व खबरों की भूख को शांत कर सके। ऐसे में जनपद की इस महती अवश्यकता की पूर्ति हेतु शेखावाटी बाजार पत्रिका को एक बार फिर डिजि
टल रूप में एसबीपी न्यूज के नाम से शुरू करने का लघु प्रयास शुरू किया जा रहा है। जिसमें आपको 14 सितंबर से यू-ट्यूब, ब्लॉग और मोबाइल एप्प के जरिए सीकर से लेकर प्रदेश और देश से लेकर दुनिया तक की हर खास खबर अनूठे अंदाज में पहुंचाई जाएगी। साथ ही सप्ताहभर पर कार्टूनिस्ट की नजर, राशिफल, वैदिक कहानियों और स्पेशल स्टोरी पैकेज और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के साथ 'खबरों की सुध ' लेने में भी रोजाना आपसे मुखातिब होउंगा। हमारा प्रयास आपको धार्मिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और राजनीति से जुड़े सम सामयिक मुद्दों से भी अवगत करवाना है।
यह एक प्रयास है जिसके पीछे मेरा लघु सकंल्प व आपका सहयोग ही सफलता का मुख्य आधार होगा। आइए, पूर्ण सहभागिता की भावना के साथ इस प्रयास को सफल बनाकर शेखावाटी से एक नए प्रयोग की शुरुआत करें।
कमल माथुर
चार दशक की सक्रिय पत्रकारिता के दौर में मैंने उन ढेर सारे खट्टे मीठे अनुभवों को जीया है जो प्रिंट मीडिया में आये उन बलदवालों के जीवंत दस्तावेज हैं जिनकी चर्चा- परिचर्चा करके फुर्सत के क्षणों में अतीत के गौरवशाली इतिहास को एक धरोहर के रूप में याद रखा जा सकता है। सत्तर के दशक में जब मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में पहला कदम रखा था तब साप्ताहिक समाचार पत्रों का दौर था। प्रदेश में इने-गिने ही दैनिक अखबार थे, जो राजधानी जयपुर, अजमेर व जोधपुर से ही प्रकाशित होते थे। बाकी पत्रकारिता के नाम पर जिला मुख्यालयों से स्थानीय साप्ताहिक अखबार ही थे जो आम लोगों तक अपले इलाकों की खबरें पहुंचाया करते थे। इन अखबारों से जुड़े पत्रकार हालांकि आर्थिक दृष्टि से संपन्न नहीं होते थे, परन्तु सामाजिक सम्मान व प्रतिष्ठा की दृष्टि उनका एक स्थान हुआ करता था। धीरे-धीरे समय बदला और जो पत्रकारिता किसी समय पर एक मिशन हुआ करती थी वह बदलते-बदलते एक तगड़े 'प्रोफेशनÓ में बदल गयी और आज इस क्षेत्र में जो कमाई व क्रेज है वह किसी अच्छी भली इंडस्ट्री से कम नहीं है। पुराने पत्रकार भले ही आज भी लकीर के फकीर बने फाकामस्ती की जिंदगी बिताते मिल जाये परन्तु नये- नये बनने वाले पत्रकार तो एक अच्छे से पैकेज से अपने कैरियर की शुरुआत करते हैं और कुछ ही समय में जरुरत की सारी भौतिक सुख सुविधाएं जुटाकर अच्छी भली 'लग्जरी ' लाईफ एंजोय करने लगते हैं। इसके लिए उन्हें मेहनत के साथ- साथ फील्ड में रोज नई चुनौतियां भी स्वीकार करनी पड़ती है। मगर यह चुनौतियां उन्हें अपने कार्य व लक्ष्य के प्रति नवीन उर्जा ही प्रदान करती है। ऐसे में हमारे सामने आज पत्रकारिता का जो बदला हुआ स्वरूप नजर आता है उसमें मालिक से लेकर सामान्य पत्रकार तक हर कोई पूरी तरह संतुष्ट नजर आता है।
पत्रकारिता के इसी बदलते माहौल में अब प्रिंट मीडिया के मुकाबले इलेक्ट्रोनिक व सोशियल मीडिया का जो स्वरूप उभरा है उसने तो पत्रकारिता के सारे आयाम ही बदल दिये हैं। इस बदले माहौल में खबरों के पाठक कम व दर्शक और श्रोता ज्यादा होते जा रहे हैं। लोग पढऩे से पहले खबर को स्क्रीन पर विस्तार से देख व सुन चुकते हैं। ऐसे में पत्रकारिता में जिंदा रहने के लिए मेरी पीढ़ी के पत्रकारों को भी नये परिवेश में ढलना पड़ रहा है। शेखावाटी जनपद में चूंकि कोई बड़ा न्यूज चैनल नहीं है, ऐसे में यहां के समाचारों को वह महत्व नहीं मिल पाता जो लोगों की जिज्ञासा व खबरों की भूख को शांत कर सके। ऐसे में जनपद की इस महती अवश्यकता की पूर्ति हेतु शेखावाटी बाजार पत्रिका को एक बार फिर डिजि
टल रूप में एसबीपी न्यूज के नाम से शुरू करने का लघु प्रयास शुरू किया जा रहा है। जिसमें आपको 14 सितंबर से यू-ट्यूब, ब्लॉग और मोबाइल एप्प के जरिए सीकर से लेकर प्रदेश और देश से लेकर दुनिया तक की हर खास खबर अनूठे अंदाज में पहुंचाई जाएगी। साथ ही सप्ताहभर पर कार्टूनिस्ट की नजर, राशिफल, वैदिक कहानियों और स्पेशल स्टोरी पैकेज और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के साथ 'खबरों की सुध ' लेने में भी रोजाना आपसे मुखातिब होउंगा। हमारा प्रयास आपको धार्मिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और राजनीति से जुड़े सम सामयिक मुद्दों से भी अवगत करवाना है।
यह एक प्रयास है जिसके पीछे मेरा लघु सकंल्प व आपका सहयोग ही सफलता का मुख्य आधार होगा। आइए, पूर्ण सहभागिता की भावना के साथ इस प्रयास को सफल बनाकर शेखावाटी से एक नए प्रयोग की शुरुआत करें।
कमल माथुर
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